Never miss a great news story!
Get instant notifications from Economic Times
AllowNot now


You can switch off notifications anytime using browser settings.

निवेश

11,921.50-96.9
Stock Analysis, IPO, Mutual Funds, Bonds & More
hi

म्यूचुअल फंड में भी होती है 'साइड पॉकेट', क्या आप इसका मतलब जानते हैं?

​क्या है साइड पॉकेट?
1/4

​क्या है साइड पॉकेट?

साइड पॉकेट एक विकल्प है. इसका इस्तेमाल डेट पोर्टफोलियो में जोखिम वाले एसेट को अन्य लिक्विड एसेट से अलग करने के लिए होता है. दरअसल, बॉन्डों की क्वालिटी का डेट पोर्टफोलियो के क्रेडिट प्रोफाइल पर असर पड़ता है. अकाउंटिंग के इस तरीके को अपनाकर छोटे निवेशकों को उस वक्त बचाया जा सकता है जब अचानक बड़े निवेशक स्कीम से पैसा निकालना शुरू कर दें. साइड पॉकेटिंग नेट एसेट वैल्यू (NAV) में स्थिरता लाने में मदद करती है. स्कीम से अचानक पैसा निकालने की रफ्तार को रोकती है.

​कैसे किया जाता है यह काम?
2/4

​कैसे किया जाता है यह काम?

इस प्रक्रिया में पोर्टफोलियो में डिफॉल्ट कैटेगरी में शामिल इंस्ट्रूमेंट को दूसरों से अलग करते हैं. इससे दो स्कीमें तैयार हो जाती है. एक में वे इंस्ट्रूमेंट या बॉन्ड होते हैं जिनमें लिक्विडिटी नहीं होती है और दूसरे में वे जिनमें अच्छी लिक्विडिटी होती है.

​निवेशकों के लिए कैसे है उपयोगी?
3/4

​निवेशकों के लिए कैसे है उपयोगी?


मान लेते हैं कि एक फिक्स्ड इनकम फंड है जिसका एयूएम 1,000 करोड़ रुपये है. अपने पोर्टफोलियो का 5 फीसदी या 50 करोड़ इस फंड ने उस कंपनी में लगाया जो डिफॉल्ट कर गई. यानी बाकी का 950 करोड़ रुपये अच्छे इंस्ट्रूमेंट में है. एक कंपनी के डिफॉल्ट के कारण कई बड़े निवेशक और नुकसान से बचने के लिए अमूमन स्कीम से पैसा खींचने लगते हैं. इन निवेशकों को भुगतान करने के लिए मजबूरन फंड मैनेजर अच्छे बॉन्डों को बेचते हैं. जबकि खराब वाले स्कीम में बने रहते हैं. कारण है कि इन्हें खरीदने वाले लिवाल बाजार से गुम हो जाते हैं. इस स्थिति में पोर्टफोलियो में खराब एसेट की होल्डिंग बढ़ती है. इससे एनएवी में तेज गिरावट आती है. लिहाजा, निवेशकों को नुकसान होता है. इन हालात से बचने के लिए फंड प्रभावित कंपनी के डेट पेपरों (बॉन्ड) को अलग कर देता है. जबकि बाकी के अच्छे बॉन्ड मूल फंड में बने रहते हैं. ओरिजनल फंड के सभी निवेशकों को साइड पॉकेट किए गए फंडों की भी यूनिटें मिलती हैं. जब कभी प्रभावित कंपनी पैसे लौटाती है. निवेशक अपने पैसे पा जाते हैं.

क्या साइड-पॉकेटिंग के नुकसान हैं?
4/4

क्या साइड-पॉकेटिंग के नुकसान हैं?

साइड-पॉकेटिंग का इस्तेमाल बड़ी सतर्कता से करना चाहिए. विश्लेषक कहते हैं कि डिफॉल्ट एसेट के वैलुएशन का असर चूंकि अच्छे इंस्ट्रूमेंट पर पड़ता है. इसलिए खराब एसेट की वैल्यू का पता लगाना कठिन होता है. निवेशकों को अक्सर दो तरह की एनवीवी को ट्रैक करने में कठिनाई आती है. फंड हाउस को मैनेजरों की फीस बचाने के लिए साइड पॉकेट का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए.

X
User

हमें फॉलो करें


ईटी ऐप हिंदी में डाउनलोड करें


Copyright © 2019 Bennett, Coleman & Co. Ltd. All rights reserved. For reprint rights: Times Syndication Service