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Stock Analysis, IPO, Mutual Funds, Bonds & More
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अपार्टमेंट का साइज घटाकर डिमांड बढ़ाने की कोशिश में हैं बिल्डर

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बदल रहे हैं रणनीति
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बदल रहे हैं रणनीति

करीब छह साल से कमजोर मांग का सामना कर रहे बिल्डर अब ग्राहकों को लुभाने के लिए नए तरीके अपना रहे हैं. रियल एस्टेट मार्केट में नकदी की तंगी, खरीदारों की बदलती प्राथमिकता और अफोर्डेबिलिटी को लेकर बढ़ती चिंता ने डेवलपर को अपनी रणनीति में बदलाव करने पर मजबूर कर दिया है.

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पांच साल में घटा है आकार
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पांच साल में घटा है आकार

रियल्टी की कमजोर मांग और बाजार में नकदी के संकट की वजह से से रियल्टी कंपनियों पर सात अहम प्रॉपर्टी मार्केट में अपार्टमेंट साइज घटाने का दबाव भी बढ़ा है. बिल्डर ने पिछले पांच साल में अपार्टमेंट का औसत साइज 27% तक कम कर दिया है

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घट रहे हैं आकार
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घट रहे हैं आकार

साल 2014 में देश में अपार्टमेंट का साइज करीब 1,400 वर्ग फुट होता था, जो साल 2019 में घटकर 1,020 वर्ग फुट पर आ गया है. इसकी प्रमुख वजह रियल एस्टेट सेक्टर में मांग की मी कहा जा सकता है. एनारॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट के आंकड़ों के मुताबिक देश के सबसे महंगे प्रॉपर्टी मार्केट मुंबई में अपार्टमेंट साइज 45 फीसदी तक घटा है.

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किस शहर में कितनी कमी?
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किस शहर में कितनी कमी?

अगर पुणे के प्रॉपर्टी मार्केट की बात करें तो यह अपार्टमेंट साइज के मामले में 38 फीसदी तक की कमी के साथ दूसरे नंबर पर रहा. हैरानी की बात यह है कि इस दौरान आवासीय बाजार में सबसे बुरे दौर से गुजर रहे NCR (नेशनल कैपिटल रीजन) में अपार्टमेंट का साइज महज 6 फीसदी घटा है. यह 1,390 वर्ग फुट पर रहा है. बेंगलुरु में साल 2019 में फ्लैट साइज घटकर 1,300 वर्ग फुट तक आ गया है.

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सरकारी योजना का फायदा
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सरकारी योजना का फायदा

एनारॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट के चेयरमैन अनुज पुरी ने ईटी से कहा, "बड़े शहरों में अपार्टमेंट साइज कम होने के महत्वपूर्ण कारणों में किफायती मकानों की डिमांड सबसे ऊपर है. फ्लैट के खरीदार किफायती आवास के लिए मोदी सरकार की क्रेडिट सब्सिडी का फायदा उठाने की संभावना भी तलाश रहे हैं. प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ उठाने के लिए आवासीय मकान की कीमत 45 लाख रुपये से कम होने की शर्त होती है. साथ ही, ओवरऑल लोडिंग सहित कार्पेट एरिया 60 वर्ग मीटर या 850 वर्ग फुट बिल्ट-अप एरिया से अधिक नहीं होना चाहिए."

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जीएसटी का भी फायदा
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जीएसटी का भी फायदा

अपार्टमेंट का साइज खासतौर पर अफोर्डेबल सेगमेंट में खरीदारों को सब्सिडी का फायदा लेने में मदद कर रहा है. इसके साथ ही किफायती मकान खरीदने से जीएसटी का लाभ भी मिलता है. मिड सेगमेंट होम पर 5 फीसदी जीएसटी के मुकाबले अफोर्डेबल हाउसिंग पर इसकी दर सिर्फ एक फीसदी है.

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जगह का अधिकतम इस्तेमाल
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जगह का अधिकतम इस्तेमाल

ओजोन ग्रुप के सीईओ (मुंबई) रजत खंडेलवाल ने ईटी से कहा, "घर खरीदने वाले ग्राहक थोड़ी सी जगह भी बर्बाद नहीं करना चाहते. घर का टिकट साइज गेम चेंजर साबित हो रहा है, लेकिन अपार्टमेंट की डिजाइनिंग के वक्त लायबिलिटी को अहमियत दिए जाने की जरूरत होती है. हमने दो प्रोजेक्ट में 3-बेडरूम अपार्टमेंट का साइज 10-15 फीसदी तक घटाया है, इससे बिक्री बढ़ाने में काफी मदद मिली है."

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सुधर रहे हैं हालात
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सुधर रहे हैं हालात

बिल्डर की इस पहल से खरीदारों की लागत कम होने के साथ उन्हें अतिरिक्त फायदे भी मिलते हैं. भले ही अपार्टमेंट का साइज पहले के मुकाबले कम हो जाता है, लेकिन डेवलपर को भी ज्यादा खरीदार मिल रहे हैं. इस वजह से हालांकि कई बिल्डर को अपना पसंदीदा लग्जरी मार्केट छोड़ना भी पड़ा है.

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दक्षिण भारत में कम घटा
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दक्षिण भारत में कम घटा

प्रॉपर्टी मार्केट के हिसाब से सभी टॉप शहरों में मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) का औसत अपार्टमेंट साइज सबसे कम है. यह साल 2014 के 960 वर्ग फुट से घटकर 530 वर्ग फुट पर आ गया है. पिछले पांच साल में दक्षिण भारत के चेन्नई में अपार्टमेंट का साइज आठ फीसदी, बेंगलुरु में नौ फीसदी और हैदराबाद में 12% घटा है.

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पुणे की क्या है हालत?
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पुणे की क्या है हालत?

भारत के प्रमुख आईटी हब पुणे में पिछले पांच साल में सस्ते घर का साइज 20% तक घटा है. दिलचस्प तथ्य यह है कि शहर में सस्ते घरों की डिमांड में काफी तेजी है और बिल्डर फ्लैट का आकार घटाने से पहले काफी माथापच्ची कर रहे हैं.

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