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    म्‍यूचुअल फंड में निवेश पर ले सकते हैं लोन, जानिए क्या है तरीका

    क्या है सुविधा?
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    क्या है सुविधा?

    क्या जानते हैं कि म्यूचुअल फंड में अपने निवेश पर आप लोन ले सकते हैं? म्यूचुअल फंड यूनिटों पर लोन ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी के रूप में मिलता है. ब्याज केवल क्रेडिट की जाने वाली रकम पर वसूला जाता है. आइए इससे जुड़ी मुख्य बातें जानते हैं.

    ​ऑनलाइन/ऑफलाइन माध्यम
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    ​ऑनलाइन/ऑफलाइन माध्यम

    लोन ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों माध्यम से लिया जा सकता है. एप्लीकेशन प्रोसेस में बैंक/वित्तीय संस्थान के फेवर में म्यूचुअल फंड यूनिटें चिन्हित कर दी जाती हैं. इन्हें 'मार्किंग ऑफ लियन' कहा जाता है. लियन के मार्क हो जाने पर निवेशक इन यूनिटों को बेच या भुना नहीं सकते हैं. यानी इन म्यूचुअल फंड यूनिटों को गारंटी के तौर पर रखा जाता है.

    ​फंडों पर मार्जिन
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    ​फंडों पर मार्जिन

    लोन के तौर पर मिलने वाली रकम यूनिटों की मार्केट वैल्यू से कम होती है. इसे मार्जिन कहा जाता है. अमूमन इक्विटी फंड पर मार्जिन म्यूचुअल फंड यूनिटों के मूल्य के 50-60 फीसदी तक होता है. डेट फंडों के मामले में यह एनएवी के 75-80 फीसदी तक होता है.

    ​लियन की मार्किंग
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    ​लियन की मार्किंग

    निवेशकों को लियन मार्क करने के लिए एप्लीकेशन भरना पड़ता है. इसमें फोलियो नंबर, स्कीम का नाम, प्लान, ऑप्शन और यूनिटों की संख्या इत्यादि का ब्योरा देना होता है. डॉक्यूमेंट मिल जाने के बाद लियन मार्किंग के लिए इन्हें म्यूचुअल फंड रजिस्ट्रार के पास भेजा जाता है.

    ​कैसे खुलता है खाता?
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    ​कैसे खुलता है खाता?

    पहले ओवरड्राफ्ट सुविधा के साथ चालू खाता यानी करेंट अकाउंट खुलता है. निवेशक खाते के लिए तय की गई उधारी की सीमा तक ओवरड्राफ्ट फेसिलिटी का इस्तेमाल कर सकता है. इसमें म्यूचुअल फंड यूनिटें गारंटी के तौर पर होती हैं.

    ​कैस खत्म होता है लियन?
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    ​कैस खत्म होता है लियन?

    लियन पर बैंक का हक होता है. जिस बैंक से लोन लिया जाता है, उसे ही इसे खत्म करने का अधिकार है. लोन की अदायगी पर वह लिखित में गारंटी (यूनिटें) को उधार लेने वाले व्यक्ति के पक्ष में जारी करता है. लोन की अदायगी में विफल होने पर बैंक यूनिटों को जब्त कर सकता है. लोन की रकम वसूल करने के लिए वह लियन के तहत रखी गई यूनिटों को भुना लेता है.

    ​किन बातों का रखें ध्यान
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    ​किन बातों का रखें ध्यान

    1. बैंकों ने चुनिंदा म्यूचुअल फंड स्कीमों की लिस्ट को मंजूर कर रखा है, जिन पर वे इस सुविधा को देते हैं. 2. वैसे तो यूनिटों पर लियन मार्क कर दिया है, लेकिन इनसे कमाया जाने वाला डिविडेंड निवेशक को मिलता रहता है.
    इस पेज की सामग्री सेंटर फॉर इंवेस्टमेंट एजुकेशन एंड लर्निंग (सीआईईएल) के सौजन्य से. गिरिजा गादरे, आरती भार्गव और लब्धि मेहता का योगदान.

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