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अक्टूबर आ रहा है, आप ई-अकाऊंट के बिना ज्यादातर बीमा पॉलिसियॉं खरीदने में समर्थ नहीं होंगे

बीमा उद्योग जल्द ही डिजिटल क्रांति का गवाह बनने के लिए तैयार है. 1 अक्टूबर 2016 से बीमा पॉलिसियां इलेक्ट्रॉनिक रूप में जारी होने लगेंगी. यह ऑनलाइन शेयर खरीदने की तरह है, जिसके बाद उन्हें डीमैट रूप में रखा जाता है. सभी मोटर बीमा और विदेश यात्रा बीमा पॉलिसियों सहित ज्यादातर पॉलिसियां, केवल डीमैट रूप में खरीददारी योग्य होंगी. इसलिए, अक्टूबर 2016 से ज्यादातर पॉलिसियां खरीदने या नवीनीकृत कराने के लिए आपको ई-इंश्योरेंस अकाऊंट(ईआईए) चाहिए होगा.

इस समय, इंश्योरेंस रिपॉजिटरीज मौजूदा भौतिक पॉलिसी दस्तावेजों को डीमैट रूप में परिवर्तित करने की प्रक्रिया में हैं, लेकिन अक्टूबर से पॉलिसियां डीमैट रूप में जारी की जाएंगी. भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (ई-इंश्योरेंस पॉलिसियों का निर्गमन) विनियम, 2016 डिजिटल बीमा पॉलिसियों के कामकाज के लिए दिशा निर्देशों का उल्लेख करता है.

डीमैट खाता शेयर, बांड सहित सिक्योरिटीज में निवेश करने के लिए जो फायदे ले आया है, पॉलिसीधारकों के लिए ई-इंश्योरेंस का लाभ उसके समान हो सकता है. आवेदन पत्र भरने से लेकर पॉलिसी दस्तावेज जारी करने से लेकर ऑनलाइन भुगतान करने तक, पूरी प्रक्रिया जल्द ही कागज रहित हो सकती है.

जरा डुप्लीकेट पॉलिसी दस्तावेज के लिए आवेदन न करने के बारे में सोचे, जो एफआईआर दर्ज कराने और क्षतिपूर्ति बांड तैयार करने सहित लंबी प्रक्रिया की जरूरत पर जोर देता है. अब कई कंपनियों के पॉलिसी दस्तावेज, रिकॉर्ड बनाए रखना और प्रबंधन करना भी आसान हो जाएगा.

फ्यूचर जेनेराली इंडिया इंश्योरेंस की चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर, ऐश्वरा नारायणन कहती हैं "इससे भी बढ़कर महत्वपूर्ण बात, ग्राहक अब धोखेबाजों, धोखेबाजी और जालसाजी वाली पॉलिसियों द्वारा धोखा दिए जाने से असुरक्षित नहीं रहेंगें क्योंकि डिजिटल पॉलिसियां प्रामाणिक होंगी".

समय के साथ एकल विचार मंच से निश्चित रूप से पॉलिसीधारक के अनुभव में सुधार आना चाहिए. लेकिन ऐसा लगता है कि प्रतिक्रिया अभी तक उत्साहजनक नहीं रही है. एसवी रामानन, सीईओ, सीएएमएस रिपॉजिटरी सर्विस बताते हैं, "ई-इंश्योरेंस अकाऊंट के प्रति प्रतिक्रिया अभी तक उत्साहजनक नहीं रही. कारण यह है कि यह अभी अच्छी तरह से बाजार में जाना नहीं गया है. पॉलिसीधारक सेल्सपर्सन या बीमा कंपनी की सिफारिश पर भरोसा करते हैं और इस समय यह उनकी प्राथमिकता नहीं है."

इसलिए, रिपॉजिटरी और बीमा कंपनियों सहित सभी हितधारकों को कुछ प्रकार की जागरूकता पैदा करना चाहिए. अनिल चोपड़ा, समूह सीईओ और निदेशक, बजाज कैपिटल, कहते हैं, "दोनों श्रेणियों से ई-इंश्योरेंस अकाऊंट की स्वीकार्यता और उपयोग बड़ी चुनौती है. इस सुविधा के बारे में गैर-जागरूकता और बीमा कंपनियों की ओर से ईआईए को बढ़ावा न देना बड़ी बाधा है . इसलिए दोनों खंडों में प्रतिक्रिया कम है."

इसलिए यदि पॉलिसी के नवीकरण का समय आ रहा है, खासकर यदि इसमें कार बीमा शामिल है, तो आप अपने पास पहले से ही ई-आकऊंट होना सुनिश्चित करें. रामानन कहते हैं, "सभी मोटर पॉलिसियां नवीकरण के समय नई पॉलिसी संख्या के साथ नई पॉलिसियां हो जाती हैं. इसलिए यह नया विनियमन सभी नवीकरणों को कवर करेगा. ई-इंश्योरेंस अकाऊंट खोलने की सुविधा बीमा कंपनी द्वारा प्रदान की जाएगी और पॉलिसीधारकों को तकलीफ़ नहीं उठानी पड़ेगी."

बीमित राशि और प्रीमियम राशि के आधार पर, नियामक (आईआरडीएआई) ने बीमा पॉलिसियां अनिवार्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक रूप में जारी करने के लिए ग्रिड तैयार किया है. यह कमोबेश सभी पॉलिसियां इलेक्ट्रॉनिक मोड में ले आएगा. (नीचे दी गई तालिका देखें)

नियामक ने आपदा की आशंका वाले और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में पहले से ही ई-इंश्योरेंस पॉलिसियां जारी करना अनिवार्य बना दिया है. मोहित रोचलानी, परिचालन और दावा निदेशक, इंडियाफर्स्ट लाइफ इंश्योरेंस का कहना है, "जब तक इन क्षेत्रों में कनेक्टिविटी है और ग्राहक प्रौद्योगिकी की समझ रखने वाला है, इलेक्ट्रॉनिक पॉलिसियां जारी करना संभव होगा."

जगह अब आड़े नहीं आएगी और प्रौद्योगिकी के साथ, सर्विसिंग आसान हो सकती है. फ्यूचर जेनराली इंडिया इंश्योरेंस के नारायणन कहते हैं, "भौतिक सीमाओं को ध्यान में रखते हुए जो आपदा की आशंका वाले और संवेदनशील क्षेत्रों में हो सकती है उपयुक्त स्थान से इलेक्ट्रॉनिक पॉलिसियां जारी करना और उन्हें ईआईए में जमा करवाना समझदार विकल्प होगा."

इस समय, बीमा कंपनी पॉलिसीधारक को दस्तावेज की भौतिक प्रति जारी करती है. दस्तावेज़ बीमा कंपनी और पॉलिसीधारक के बीच पॉलिसी अनुबंध होता है और इसका कानूनी दर्जा होता है. हालांकि, अधिकांश बीमा कंपनियों ने पहले से ही भौतिक दस्तावेज़ के अलावा सॉफ्ट कॉपी भी भेजना शुरू कर दिया है.

दस्तावेजों की भौतिक प्रकृति दूर करने के लिए, इलेक्ट्रॉनिक रूप में बीमा पॉलिसियां रखने के लिए आपको किसी भी बीमा रिपॉजिटरी के पास ईआईए खोलना होगा. देश में पांच पंजीकृत बीमा रिपॉजिटरी हैं जिसमें कार्वी इंश्योरेंस रिपॉजिटरी, सेंट्रल इंश्योरेंस रिपॉजिटरी, सीएएमएस रिपोजिटरी सर्विस, एनएसडीएल डेटाबेस प्रबंधन और एसएचसीआईएल प्रोजेक्ट्स शामिल हैं.

रोचलानी का कहना है, "चूंकि अधिकांश बीमा कंपनियों ने पहले से ही इंश्योरेंस रिपॉजिटरी के साथ टाई-अप कर लिया है इसलिए विनियमों के अनुसार समयसीमा के मामले में इलेक्ट्रॉनिक बीमा पॉलिसियां जारी करना बड़ी चुनौती नहीं होना चाहिए, हालांकि इन विनियमों पर जीवन बीमा परिषद के माध्यम से इस उद्योग द्वारा कुछ स्पष्टीकरण मांगे गए हैं."

प्रारंभिक हिचकोले

हालांकि, ईआईए खोलेने में उसकी अपनी चुनौतियां हो सकती हैं. नई बीमा पॉलिसिया खरीदने वालों के लिए ईआईए की आवश्यकता होगी और यहां तक कि मौजूदा पॉलिसीधारक भी डिजिटल रूप में आपनी पॉलिसीयां रखने के लिए ईआईए खाता खोलने का विकल्प चुन सकते हैं.

बीमा एजेंट की सेवाएं इसके लिए काम आ सकती हैं. नीलेश परमार, सीओओ, एडलवाइस टोक्यो लाइफ कहते हैं, 'तत्काल अवधि में, हम सभी ऑनलाइन ग्राहकों के लिए ई-बीमा पॉलिसियां अनिवार्य रूप से जारी करने के कारण कुछ व्यवधान देखते हैं. जिनके पास ऐसा खाता नहीं है, ऐसे ग्राहकों को ईआईए खाता खोलने की जरूरत समझाना और ग्राहकों के विशाल बहुलांश के लिए यह खाता खोलने की वास्तविक प्रक्रिया कुछ चुनौतियां खड़ी कर सकती है."

भौतिक फार्म भरने की बजाय, आपके लिए ई-प्रस्ताव फार्म भरना आवश्यक हो जाएगा. जहां तक डिजिटल पहुंच का सवाल है, तो अभी भी देश का ऐसा विशाल क्षेत्र है जहां यह संभव नहीं हो सकता है. चोपड़ा कहते हैं, "छोटे शहरों और गांवों तक और ऐसे पॉलिसीधारक तक, जो इंटरनेट की समझ रखने वाले नहीं हैं, इसका विस्तार चुनौतीपूर्ण है". इस मामले में, ई-प्रस्ताव फार्म का भौतिक संस्करण भरना होगा और फिर बीमा कंपनी को दी गई जानकारी इलेक्ट्रॉनिक संस्करण में परिवर्तित करनी होगी.

नारायणन कहते हैं, "कंपनियों को इलेक्ट्रॉनिक इंश्योरेंस अकाऊंट खोलने के लिए रिपॉजिटरी के पास व्यवस्था शुरु करने के अलावा डिजिटल हस्ताक्षर आयोजित करना पड़ सकता है. ये बड़ी चुनौतियां नहीं हैं".

निष्कर्ष

बीमा क्षेत्र में डिजिटल प्लेटफार्म का उद्भव न केवल सुरक्षा और सुविधा लाएगा बल्कि प्रीमियम में कमी भी लाएगा. विनियम छूट की पेशकश करने की अनुमति देते हैं, और भविष्य में यह किस प्रकार बीमा उद्योग के परिदृश्य में परिवर्तन लाएगा देखने की बात है.

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