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The Economic Times

फिक्स्ड डिपॉजिट पर बैंक के लिए सही समय? मालूम करें

सुनील धवन द्वारा

जहा अटकलबाजी शुरू हो गई है कि क्या आरबीआई 9 अगस्त 2016 की मौद्रिक नीति बैठक में नीतिगत दरों में 0.25 प्रतिशत कटौती की दिशा में आगे बढ़ेगा या या नहीं, वहीं निवेशकों के लिए उचित रूप से वर्तमान उच्च ब्याज दरों पर फंड लॉक इन करने के लिए तेजी से कार्य करने की जरूरत है. अधिल शेट्टी, सीईओ और सह संस्थापक, Bankbazaar.com कहते हैं, '’ब्याज दरों के नीचे की ओर जाने के रूझान के साथ, यह निश्चित रूप से जोखिम से बचने वाले निवेशकों के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट में अपना पैसा लॉक इन करने का अच्छा समय है." यदि मानसून सामान्य बना रहता है और समान रूप से फैलता है, तो ब्याज दरों में कटौती की अत्यधिक संभावना होगी. इसलिए, पहले बैंकों को कार्यवाही करना चाहिए और अपनी जमा दरों में कमी करनी चाहिए, चलिए निवेशकों के लिए उपलब्ध विकल्पों पर नज़र डालते हैं.

बैंक की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) में पैसा जमा करने से ज्यादा मदद नहीं मिलती है. ये कम रिटर्न और कम मुद्रास्फीति समायोजित रिटर्न देते हैं. इसलिए, इन्हें इक्विटी निवेश का विकल्प मानना सही नहीं है. जहां इक्विटी लंबे समय में अधिक उच्च वास्तविक रिटर्न पैदा करने में मदद करती है वहीं आदर्श ऋण परिसंपत्ति के रूप में एफडी अपनी पूंजी का संरक्षण करने में मदद करता है.

बैंक जमाएं

बैंक का फिक्स्ड डिपॉजिट हमेशा निवेशकों के बीच सबसे लोकप्रिय विकल्प रहा है. कोई आश्चर्य नहीं कि बैंक विभिन्न मैच्योरिटीज वाली जमाओं से ओतप्रोत होते हैं. केवल कुछ वर्ष पहले 9 प्रतिशत की उच्च दर की तुलना में, वर्तमान में अपनी 12 महीने की जमा पर बैंकों द्वारा की प्रदान की जाने वाली दर 7.25 प्रतिशत और 7.75 प्रतिशत प्रतिवर्ष के बीच है. वरिष्ठ नागरिकों को जमाओं पर 50 आधार अंकों का अतिरिक्त ब्याज मिलता है. यहां तक कि कंपनी फिक्स्ड डिपॉजिट दरों में पिछले कुछ वर्षों में कमी आई है. उदाहरण के लिए, श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस एंड महिंद्रा फाइनेंस, जो तीन वर्ष पहले अपनी जमाओं पर कहीं भी 10 और 11 प्रतिशत के बीच ब्याज का भुगतान किया करते थे, अब 8 और 9 प्रतिशत के बीच भुगतान करते हैं.


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लैडरिंग

लंबे समय के दौरान ब्याज दर की दिशा के बारे में अनुमान लगाना अर्थशास्त्रियों सहित सभी के लिए संभव नहीं हो सकता है. इसलिए, एक विशेष अवधि के लिए फंड लॉक करने की बजाय, निवेशक ‘लेडरिंग’ के माध्यम से विभिन्न मैच्योरिटीज में राशि फैला सकता है. यह न केवल फंड के लिए तरलता प्रदान करता है, बल्कि 'पुर्ननिवेश जोखिम' का प्रबधन करता है. जब सबसे कम अवधि की एफडी मैच्योर होती है, तो उसका सबसे लंबी अवधि के लिए नवीनीकरण कराएं और प्रक्रिया जारी रखें जब और जैसे-जैसे विभिन्न एफडी मैच्योर हो. ऐसा करते समय, यह सुनिश्चित करें कि आपकी नियमित आय की जरूरत पूरी होती है, और जमाएं विभिन्न मैच्योरिटीज और संस्थाओं में फैली हुई हैं.

कंपनी फिक्स्ड डिपॉजिट

ऐसी जमाएं अधिक रिटर्न प्रदान कर सकती हैं. विशेष रूप से वे जिनकी कम रेटिंग है. शेट्टी बताते हैं, "कॉर्पोरेट एफडी आम तौर पर सभी अवधियों में बैंक एफडी की तुलना में 100 से 250 बीपीएस अधिक रिटर्न प्रदान करती है." निवेशक, विशेष रूप से नियमित आय पर निर्भर सेवानिवृत्त नागरिक, ऊंची ब्याज दरें देने वाली जमाओं से प्रलोभित हो सकते हैं. लेकिन आपको हर कीमत पर ऐसी कंपनियों से बचना चाहिए. कंपनी फिक्स्ड डिपॉजिट के मामले में, मूलधन और ब्याज या दोनों को खोने का जोखिम अधिक होता है. याद रखें, ये असुरक्षित जमाएं हैं और इसलिए बैंक में जमा राशि की तुलना में इनके साथ बड़ा जोखिम होता है. हालांकि इनके साथ क्रेडिट रेटिंग होती है, लेकिन अतीत में कई रेटेड कंपनियों ने भुगतान में चूक की है. इसलिए आपको सावधानी पूर्वक मूल्यांकन करने के बाद इन पर विचार करना चाहिए.

लगातार कई वर्षों तक उच्चतम क्रेडिट रेटिंग वाली कंपनियों या जो कंपनियां प्रसिद्ध हैं और जिनके पास स्थापित ब्रांड है पर अभी भी विचार किया जा सकता है. अलग-अलग कंपनियों में फैली छोटी राशि फिर भी खतरा कम कर सकती है. यहाँ शेट्टी सलाह देते हैं, "डिफ़ॉल्ट जोखिम बहुत ही महत्वपूर्ण जोखिम है, निवेशकों को कंपनी एफडी में निवेश करने से पहले मूल्यांकन करना चाहिए. क्रेडिट रेटिंग एक ऐसा ही मानदंड है जो आपको डिफालट की संभावना पर समझ देता है. हालांकि, मैं निवेशकों के लिए निवेश करने से पहले कंपनी के प्रबंधन और व्यापार मॉडल को समझने में थोड़ा समय खर्च करने की सिफारिश करता हूँ. कुल मिलाकर, (कंपनी) एफडी में, आप वास्तव में पैसा कंपनी को उधार दे रहे हैं!"


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पूरी तरह से कर योग्य आय

बैंक और कंपनी एफडी (यहां तक कि आवर्ती जमा भी) पर अर्जित ब्याज पूरी तरह से कर योग्य है, अर्थात इसे आप की आय में जोड़ा जाता है और फिर उसके बाद अपने आय स्लैब के अनुसार आपको टैक्स का भुगतान करना होता है. एफडी पर कर पश्चात रिटर्न कम होता है और साथ ही कभी-कभी मुद्रास्फीति समायोजित करने में असमर्थ होता है. शेट्टी कहते हैं, "मेरा मानना है कि एफडी को निवेश उत्पाद की तुलना में बचत उत्पाद के रूप में देखा जाना चाहिए. करजाल, फिक्स्ड डिपॉजिट से वास्तविक रिटर्न का रूझान अधिकांश समय मुद्रास्फीति की तुलना में कम होता है." इसलिए, ये कम टैक्स ब्रैकेट वाले निवेशकों के अनुकूल होते हैं. हालांकि, 30.9 प्रतिशत टैक्स स्लैब वाले निवेशकों के लिए, कर पश्चात रिटर्न लगभग 5 फीसदी के आसपास होता है.


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एफडी और कर मुक्त बांड

वैकल्पिक रूप से, कर मुक्त बांड बाजार में वर्तमान में उपलब्ध नहीं हैं और आपको उन्हें द्वितीयक बाजार से खरीदना पड़ सकता है. वर्तमान लाभ लगभग 6.5 फीसदी है, जो एक पखवाड़े के भीतर बहुत तेजी से बदल सकता है. इसलिए, कर मुक्त बांड उच्चतम टैक्स स्लैब वाले कर दाताओं के अनुकूल नहीं हो सकता है. इनकी 10 से 20 वर्ष की लंबी मैच्योरिटी अवधि होती है. वहीं दूसरी ओर, एफडी 12 से लेकर 120 महीने तक की मैच्योरिटी प्रदान करते हैं. एफडी में रिटर्न निश्चित होता है, जबकि कर मुक्त बांड निश्चित रिटर्न के लिए मैच्योरिटी तक रखना पड़ता है. यदि मैच्योरिटी से पहले बेच दिया जाता है, तो लाभ बदल सकता है जिससे समग्र रिटर्न प्रभावित हो सकता है. इसलिए, कर मुक्त बांड उन लोगों के लिए अनुकूल होता है जिनका 10 से अधिक वर्षों का निवेश क्षितिज होता है और जो उन्हें मैच्योरिटी तक धारण करने के लिए तैयार होते हैं.

जमाओं में स्रोत पर कर

यदि बैंक जमा (आवर्ती जमा, एक ही बैंक की अन्य शाखाओं में जमा, नाबालिग के नाम पर भी जमाओं सहित) पर अर्जित ब्याज आय वित्तीय वर्ष में 10,000 रुपये से अधिक होती है, तो बैंक संपूर्ण ब्याज आय पर 10 प्रतिशत की स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) करते हैं. कटौती किए गए कर फॉर्म 26एएस में परिलक्षित होते हैं, जिसे आप डाउनलोड या बैंक से प्राप्त कर सकते हैं. कंपनी फिक्स्ड डिपॉजिट के मामले में, टीडीएस तब लागू होता जब ब्याज आय एक वर्ष में 5,000 रुपये से अधिक होती है.

ऐसे किसी व्यक्ति के लिए जिसकी वित्तीय वर्ष में कुल आय छूट की सीमा के भीतर रहती है, टीडीएस की कटौती न करने के लिए बैंक के पास जमाकर्ता द्वारा फार्म 15 जी / फार्म 15 एच (वरिष्ठ नागरिकों द्वारा) प्रस्तुत किया जा सकता है. यदि एक वर्ष से अधिक के लिए जमा करते हैं, तो आदर्श रूप से हर साल अप्रैल में ये फॉर्म जमा करें.

5 वर्ष का अधिसूचित कर बचत वाला फिक्स्ड डिपॉजिट

ऐसे व्यक्ति के लिए जिसने एक वर्ष में 1.5 लाख रुपये की धारा 80सी की सीमा समाप्त नहीं की है और डेब्ट टैक्स सेवर की तलाश में है तो, बैंक में 5 वर्ष का अधिसूचित कर बचत वाला फिक्स्ड डिपॉजिट काम आ सकता है. हालांकि ब्याज आय कर योग्य होती है. ज्यादातर बैंक वह दर प्रदान करते हैं जो नॉन-टैक्स सेवर जमा दरों की तुलना में थोड़ा कम होती है. यदि आप इनके लिए आगे बढ़ना चाहते हैं तो, सावधानी पूर्वक चुनें.

जुड़े जोखिम

बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट, प्रति बैंक अर्थात एक विशेष बैंक की सभी शाखाओं में कुल जमा के लिए अधिकतम 1 लाख रुपए (मूलधन और ब्याज सहित) तक बीमित होता है. बैंक द्वारा चूक के मामले में, जिसकी संभावना वर्तमान परिदृश्य में दूर की कौड़ी नजर आती है, कोई भी वृद्धिशील राशि जोखिम के प्रति अतिसंवेदनशील बनी रहती है. आप एक बैंक में पैसा रखने की बजाय एक से अधिक बैंकों में राशि फैला सकते हैं जब तक उसे बनाए रखना कोई मुद्दा न हो.

निष्कर्ष

ऐसी जमाएं आदर्श रूप से उनके अनुकूल होती हैं जिन्हें नियमित आय की जरूरत होती है. लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए इस्तेमाल किए जाने की बजाय इनका पूंजी के संरक्षण के लिए सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाता है. भले ही हाल ही के भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 5.25 प्रतिशत के आसपास मंडरा रहा है, लेकिन उच्चतम करदाता के लिए कर पश्चात रिटर्न शायद ही इसे समायोजित करेगा. इसलिए, एफडी में अपना धन समझदार तरीके से लॉक इन करें और केवल तभी जब यह कदम आपके लघु से लेकर मध्यम अवधि के लक्ष्यों का समर्थन करता हो.
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